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राष्ट्रपति की मंजिल छूने तक प्रणब ने शिखर से शून्य का दौर भी देखा
राष्ट्रपति की वैसे तो शासन के संचालन में अपनी सीमित भूमिका है मगर कुछ ऐसे विशेषाधिकार हैं जो संवैधानिक प्रमुख होने के नाते केवल वे ही कर सकते हैं। संजय मिश्र, नई दिल्ली। देश की समकालीन सत्ता सियासत में 'लिविंग इनसाक्लोपीडिया' माने जाने वाले प्रणव मुखर्जी ने इतिहास और विरासत की अपनी बौद्धिक संपदा के सहारे राष्ट्रपति भवन में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है।
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