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रोजाना 1 अखरोट खाने से होते हैं ये 9 फायदे
लगभग 28 ग्राम अखरोट खाने से आपको 100% से ज्यादा ओमेगा-3 फैटी एसिड मिलता है। अखरोट में विटामिन C, थियामिन, रिबोफ्लेविन, नियासिन, विटामिन B6, फोलेट, और विटामिन B12, E, K और विटामिन A मौजूद होने के साथ साथ कुछ मात्रा में केरोटीनोइड्स भी होते हैं। अखरोट में पोषक तत्व जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, फ़ास्फ़रोस, पोटेशियम, जिंक,कॉपर आदि भी मौजूद होते हैं जो आपके शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए जरुरी होते हैं।
रोजाना इतने गिलास पीते हैं पानी तो रहेंगे फिट
आम तौर पर इंसान को कितना पानी पीना चाहिए इसका एक मानक तय है। ज्यादातर लोग इस बात से सहमत हैं कि हमें दिन में औसतन 8 गिलास पानी पीना चाहिए। पानी की यह मात्रा कई बातों पर निर्भर करती है, जैसे कि लिंग, उम्र, शारीरिक गतिविधियों का स्तर और पर्यावरण। उन्होंने बताया कि किडनी का रोग होने पर ज्यादा पानी पीने से किडनी को कोई फायदा नहीं होता, बल्कि डॉक्टर पानी पीने की सीमा तय कर सकता है।
कैल्शियम की कमी बढ़ा सकती है परेशानियां, ना करें नज़रअंदाज
कैल्शियम की कमी से कमजोर नाखून, दांत में दर्द, मासिक धर्म दर्द, धड़कन बढ़ना जैसी परेशानियां हो सकती हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 14 से 20 साल उम्र के ज्यादातर भारतीय से कैल्शियम की कमी से जूझ रहे हैं। अग्रवाल ने बताया कि कैल्शियम की कमी जिसे हायपोकैल्शिमिया भी कहा जाता है, तब होता है जब आपको पूरा कैल्शियम नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि उम्र के साथ कैल्शियम की कमी हो सकती है।
अपनाएं सेहत के ये टिप्स, मां और बच्चे दोनों रहेंगे खुश
जिमपिक (ऑनलाइन फिटनेस प्लेटफॉर्म) की न्यूट्रीशन और डाइट विशेषज्ञ सुजेता शेट्टी ने बच्चों के मन में हेल्दी खाने के प्रति रुचि जगाने के संबंध में सुझाव दिए हैं। बच्चों के खाने में फल और सब्जियां शामिल करने में अक्सर मां को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अगर बच्चे को जूस देना है तो बाजार में डिब्बाबंद जूस न दें क्योंकि इसमें ज्यादा मात्रा में चीनी होती है।
अगर आप भी लेते हैं स्ट्रेस तो हो सकती है ये बीमारियां
स्ट्रेस की वजह से लोग ऐसी चीजें खाना ज्यादा पसंद करने लगते हैं, जिनमें ट्रांसफैट, नमक और चीनी की ज्यादा मात्रा होती है। स्ट्रेस हमारी मानसिक सेहत पर असर डाल सकता है, जो बेचैनी और डिप्रेशन की वजह बनता है। स्ट्रेस की वजह से लोग ऐसी चीजें खाना ज्यादा पसंद करने लगते हैं, जिनमें ट्रांसफैट, नमक और चीनी की ज्यादा मात्रा होती है। स्ट्रेस इंसान को तंबाकू, शराब और कई अन्य नशों के लिए भी प्रेरित करता है और नशे का आदी बना देता है।
हार्ट अटैक के बाद अकेले रहना हो सकता है खतरनाक
हार्ट अटैक के बाद अकेले रहना खतरनाक हो सकता है। रिसर्च के मुताबिक दिल के दौरे के एक साल बाद मौत होने की संभावना अकेले रह रहे व्यक्ति की भी उतनी ही होती है जितनी किसी के साथ रह रहे पीड़ित की होती है। लेकिन अकेले रह रहे मरीज की चार सालों में मौत होने की संभावना 35 प्रतिशत ज्यादा होती है। यह न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ाता है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है।
जल्द ही अंगूठे में होगा आपकी सेहत का राज!
आपके मेडिकल रिकार्ड्स अब ऑनलाइन हो जाएंगे और उन्हें आपकी उंगली के निशान से खोलकर देखा जा सकेगा। सरकार जल्द ही इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ पॉलिसी ला रही है। सरकार इसके लिए जल्द ही कानून बनाने जा रही है जिसके तहत मरीज की सहमति से ही उसके मेडिकल रिकॉर्ड खुलेंगे। विशेष परिस्थिति में बिना अनुमति के भी मरीज का रिकॉर्ड देखा जाएगा। हेल्थ रिकॉर्ड ऑनलाइन करने के लिए प्रक्रिया शुरु होगी है जिसके तहत इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म पर हेल्थ रिकॉर्ड ऑनलाइन होंगे।
अगर ये है आपका ब्लड ग्रुप तो आपके दिल को खतरा
शोध के निष्कर्षों से पता चलता है कि वॉन विलेब्रैण्ड फैक्टर की ज्यादा मात्रा की वजह से खतरा ज्यादा हो जाता है। ए ब्लड ग्रुप वाले लोगों को ज्यादा कोलेस्ट्रॉल के लिए जाना जाता है, जो कि दिल के दौरे का प्रमुख जोखिम कारक है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इसके अलावा, गैर ओ-ब्लड ग्रुप वाले लोगों में गैलेक्टिन-3 की उच्च मात्रा होती है। इस शोध को 'हार्ट फेल्योर 2017' और चौथे वर्ल्ड कांग्रेस के 'एक्यूट हार्ट फेल्योर' में प्रस्तुत किया गया है।
प्रेग्नेंसी के दौरान न करें स्मोकिंग, बच्चे को हो सकती है ये बीमारी
दूषित वातावरण के कारण यह बीमारी बच्चों, जवान लोगों या अन्य लोगों को भी हो सकती है। व्यक्ति जहां रहता है अगर वहां का वातावरण धूल और गंदगी भरा हो तो दमा होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। विश्व दमा दिवस के मौके पर जेपी हॉस्पिटल के पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के सीलियर डॉ। अग्रवाल ने कहा कि यह बीमारी किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है।
आपके पैरों से आती है दुर्गंध तो अपनाएं ये पांच उपाय
ये समस्या ज्यादातर उन लोगों को होती है, जिनके पैरों का पसीना सूख नहीं पाता है। जब ये पसीना बैक्टीरिया के संपर्क में आता है तो पैरों से बदबू आने लगती है। बेकिंग सोडा: बेकिंग सोडा पैरों से आने वाली बदबू को दूर करने का एक कारगर उपाय है। लैवेंडर ऑयल: लैवेंडर ऑयल से न सिर्फ अच्छी खुशबू आती है बल्कि यह बैक्टीरिया को खत्म करने में भी फायदेमंद है।
स्किन में प्रोटीन की कमी से होती है ये परेशानी
वैज्ञानिकों ने हाल ही में किए एक रिसर्च में पाया है कि त्वचा में एक खास प्रोटीन की कमी की वजह से एक्जिमा या खाज होता है। एटोपिक एक्सिमा (चकत्ते वाली खुजली) त्वचा की एक आम स्थिति है और अक्सर यह बच्चों में उनके जीवन के पहले साल में पाई जाती है। रिसर्च के निष्कर्षों से पता चलता है कि प्रोटीन फिलाग्रीन के प्रभाव से त्वचा के दूसरे प्रोटीनों और कार्यप्रणाली पर असर पड़ता है, नतीजतन खाज हो जाती है।
अलर्ट! भारत में बढ़ते जा रहे हैं लाइलाज टीबी के मामले
एक नए अध्ययन में पता चला है कि भारत में अगले दो दशकों में ड्रग-रेसिस्टैंट ट्युबरक्युलोसिस (क्षय रोग) के मामलों में इजाफा हो सकता है। 'ड्रग रेसिस्टैंट टीबी' टीबी का बिगड़ा रूप है जिसमें टीबी के बैक्टीरिया पर दवाएं असर नहीं करतीं। फेमस मेग्जीन लैंसेट में प्रकाशित स्टडी के अनुसार देश में साल 2040 तक इस बीमारी के 10 में से एक मामले ड्रग रेसिस्टैंट टीबी के हो सकते हैं।
एक ऐसा सेंसर जो करेगा हवा और सांस में रोग की पहचान
अमेरिका में शोधार्थियों ने एक ऐसा सेंसर विकसित किया है, जो हवा में जहरीले तत्वों और सांस में रोग चिन्हों की पहचान कर सकता है। इसके साथ ही यह रोग के चरणों की भी जानकारी देने में सक्षम है। इलिनॉइस यूनिवर्सिटी के शोध दल ने बताया कि जैविक प्लास्टिक का एक छोटा और पतला वर्गाकार तंत्र जल्द ही पोर्टेबल और डिस्पोजेबल सेंसर उपकरणों का आधार बन सकता है।
हर दिन खाने में शामिल करें फल और सब्जियां, होगा ये फायदा
हर दिन अपने खाने में फलों और सब्जियों की मात्रा बढ़ाने से पैरों में रक्त प्रवाह को प्रभावित करने वाली धमनियों के रोगों के विकास का खतरा कम हो सकता है। न्यूयॉर्क स्थित न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के सहायक प्राध्यापाक जेफरी बर्गर ने कहा कि हमारे अध्ययन से यह जानकारी मिली है कि आहार में अधिक फलों और सब्जियों को शामिल करने जैसे सरल तरीकों से पीएडी के प्रसार से बचने में बड़ी मदद मिल सकती है।
Alert! पेट पर ज्यादा चर्बी से हो सकता है कैंसर!
उच्च बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के अलावा पेट पर चर्बी का जमाव कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि वृद्ध लोगों में इस जोखिम की अधिक संभावना है। स्मोकिंग के बाद ज्यादा वजन या मोटापा कैंसर का दूसरा सबसे बड़ा कारण है, जिससे बचा जा सकता। इसके अलावा कमर में आठ सेंटीमीटर चर्बी की वृद्धि आंत के कैंसर के खतरे को 15 प्रतिशत बढ़ा देता है। खासकर पेट के आसपास की चर्बी कई प्रकार के कैंसर से संबंधित है।
देश की चौथाई आबादी थायरॉइड से जुड़ी कई बीमारियों की शिकार!
प्रमुख डायग्नोस्टिक चेन एसआरएल ने हाल ही में अपने डेटा विश्लेषण के आधार पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया है कि 32 फीसदी भारतीय आबादी थायरॉइड से जुड़ी विभिन्न प्रकार की बीमारियों की शिकार है। सबक्लिनिकल हाइपोथायरॉइडिज्म देश में थॉयराइड का सबसे आम विकार है, जिसका निदान बिना चिकित्सकीय जांच के संभव ही नहीं है। थायरॉइड की बीमारी आमतौर पर महिलाओं में पाई जाती है और कई तरह की समस्याएं पैदा करती हैं, जैसे वजन बढ़ना, हॉर्मोनों का असंतुलन आदि।
मोटापे से युवाओं में हो सकता है दिल के रोगों का खतरा
सामान्य से ज्यादा बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की वजह से अधेड़ और इससे अधिक की आयु में दिल के रोगों का खतरा रहता है। लेकिन एक नए शोध में पता चला है कि उच्च बीएमआई से 17 साल की उम्र में भी दिल संबंधी रोगों का खतरा हो सकता है। ब्रिटेन के ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कहा है कि बीएमआई के बढ़ने की वजह से युवा अवस्था में ही दिल संबंधी रोगों के चपेट में आने की संभावना है।
No Tobacco Day: हर रोज जाती हैं 3,288 लोगों की जान
तंबाकू उत्पादों का सेवन करने से होने वाली बीमारियों से हो रही मौतों को लेकर दुनिया के कई देश चिंतित हैं। तंबाकू और धूम्रपान उत्पादों के सेवन से देशभर में प्रतिघंटा 137 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। गेट्स सर्वे के अनुसार, देश की दस फीसदी लड़कियों ने स्वयं सिगरेट पीने की बात स्वीकार की है। औसतन धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की आयु धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की तुलना में 22 से 26 प्रतिशत तक घट जाती है।
भारत में डायरिया से बच्चों की मौत का सिलसिला जारी रहेगा : शोध
साल 2015 में डायरिया (अतिसार) के कारण पांच साल से कम उम्र के एक लाख से अधिक बच्चों की मौत के साथ ही भारत में इस बीमारी के कारण बच्चों की मौतों का सिलसिला जारी रहेगा। पत्रिका 'लांसेट इनफेक्शियस डिजिजेज' में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, साल 2015 में दुनिया भर में डायरिया के कारण पांच साल से कम उम्र के जितने बच्चों की मौत हुईं उनमें से 42 फीसदी मौतें (499,000) अकेले भारत और नाइजीरिया में हुईं।
देश में महामारी का रूप ले रही थायरॉइड की बीमारी, ये हैं कारण!
भारत में थायरॉइड के मरीजों की संख्या किस कदर बढ़ रही है, इसका खुलासा हाल ही में डायग्नोस्टिक चेन एसआरएल द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में हुआ है। हाइपोथॉयराइडिज्म का मंद रूप सबक्लिनिकल हाइपोथॉयराइडिज्म है, जो देश में थॉयराइड का सबसे आम विकार है और इसका निदान बिना चिकित्सा जांच के संभव नहीं है। थायरॉइड की बीमारी आमतौर पर महिलाओं में पाई जाती है, लेकिन अब यह केवल उन्हीं तक सीमित नहीं है।

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